यादें
लेबल: kavitaye, अनुभव, कविता, यादें, विचार | पर 7:57 pm
"यादें"
यादें आती है,
यादें जाती है...
बचपन की यादें,
गाँव की यादें...
स्कूल की यादें,
खेलों की यादें...
ज्ञान की यादें,
इतिहास की यादें...
लोगों की यादें,
मिलन की यादें...
यादें कहती है,
यादें बोलती है...
साथियों की यादे,
विचारों की यादें...
साहित्य के यादों,
अब ये यादें...
शब्दों में, सपने में,
आती है जाती है...
गुनगुनाती, हंसती,
बस यादें ही यादें....
आत्मा
लेबल: अनुभव, आत्मा, कविता, ज्ञान, परमात्मा, ब्लॉग, शरीर | पर 7:40 pm
आत्मा
शरीर ! तुझे,
ज्ञान है क्या ?
तेरे साथ,
एक आत्मा हैं ,
निराकार,
अदृश्य,
अमर,
परमात्मा का अंश !
वह सुनती बोलती है,
साथ देती है,
जन्म से मृत्यु तक,
क्या उसकी आवाज,
तुमको सुनाई देती है ?
इसे सुनो फ़िर विश्वास होगा,
परमात्मा का...
जिंदगी
लेबल: अनुभव, कविता, जन्म समाज, जिंदगी, ब्लॉग, मौत | पर 8:53 am
जिंदगी
जन्म से मौत तक का,
नजारा है,
जिंदगी....
कोई छूटा, कोई चला, कोई गिरा,
कोई मिला, कोई भूला..
बस यही तमाशा है,
जिंदगी.....
कोई चमका, कोई जीता, कोई हारा,
और बैठ गया मौत की लाइन में,
बस यही किस्सा है,
जिंदगी....
जन्म से मौत तक का,
नजारा है,
जिंदगी......
पढ़ाई
लेबल: अनुभव, कविता, किस्सा कहानी, बाल कविताये, भावनाए, लघु कथाये | पर 8:40 pm
पढ़ाई
पढ़ने को भाई पढ़ने को,
मन करता है भाई पढ़ने को...
किस्से- कहानी पढ़ने को,
चिठ्ठी - पत्री पढ़ने को...
अख़बार पढ़ने को,
खबरे जानने को....
पढ़ने को भाई पढ़ने को,
मन करता है भाई पढ़ने को...
हिसाब समझने को,
रेट पर बहस करने को...
चुनाव को जीतने को,
शोषण को लड़ने को...
पढ़ने को भाई पढ़ने को,
मन करता है पढ़ने को....
लगता है मै आदमी हूँ..................
लेबल: अनुभव, अभिव्यक्ति, कविता, किसान, पेट, भावनाए, रोटी | पर 9:47 pm
लगता है मै आदमी हूँ ....
लगता है मै आदमी हूँ
मेरे दो हाथ दो पैर है
एक सर और एक पेट है
लगता है मै आदमी हूँ ....
पेट को देखने के लिए
मै सिर को झुकता हूँ,
पेट को देखने के लिए
काम पर जाता हूँ
और बहस करता हूँ रोटी के लिए......
पर यंहा भी,
पेट को देखने के लिए
सिर को झुकता हूँ रोज़....
सुबह झुकाता हूँ, शाम झुकाता हूँ
शाम को पेट गढ्ढा नजर आता है...
एक आग सी दिखाई देती है
आग को आग से बुझाता हूँ
लगता है मै आदमी हूँ.....
लगता है वह भी आदमी है ???
उसके भी दो हाथ दो पैर एक सिर
और एक पेट है....
उसे काम पर नही जाना होता
उसे रेट पर बहस नही करना होता
उसे पेट को देखने के लिए
सिर को झुकाना नही होता
क्यों की पेट ख़ुद-बा-ख़ुद सिर को
देखता है...
लगता है की मै आदमी हूँ....







